सब्र और जज्बा माशा आल्हा 8 और 10 साल के दो भाइयों ने पेश की मिसाल तपती धूप में भी नहीं डगमगाया बच्चों का ईमान

मंगळवार 17 मार्च 2026
पूर्णा (प्रतिनिधि): पवित्र रमजान का महीना अपनी तमाम बरकतों और इबादतों के साथ जारी है। इस पाक महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग खुदा की राह में रोजे रख रहे हैं, वहीं बच्चों में भी दीन के प्रति गहरा उत्साह देखा जा रहा है परभणी जिले के पूर्णा शहर में रहने वाले रहेमान खान रफात खान (उम्र 10 साल) और रेहान खान रफात खान (उम्र 8 साल) इन दो सगे भाइयों ने चिलचिलाती धूप के बावजूद अपना पहला रोजा पूरी अकीदत और हिम्मत के साथ मुकम्मल किया हैबचपन में सब्र की मिसाल 🌙आजकल सूरज आग उगल रहा है, जिससे बड़ों के लिए भी भूख और प्यास पर काबू पाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है ऐसे में इन दोनों मासूम बच्चों ने सुबह सेहरी’ से लेकर शाम ‘इफ्तार’ तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए अपना रोजा पूरा किया सब्र की चर्चा अब पूरे पूर्णा शहर में बड़े गर्व के साथ की जा रही हैबेहतरीन तरबियत और बच्चों की हिम्मत 🤲बच्चों के वालिद रफात खान ने बताया कि बच्चों में खुद से रोजा रखने का जुनून था शाम को इफ्तार के वक्त जब बच्चों ने अपना पहला रोजा खोला, तो उनके चेहरे पर एक अलग ही सुकून और कामयाबी की चमक थी। परिवार के साथ-साथ मोहल्ले के लोगों ने भी इन नन्हें रोजेदारों का हौसला बढ़ाया और उनकी बेहतरीन तरबियत की सराहना करते हुए उन्हें ढेरों दुआओं से नवाजा। यह न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि इन बच्चों द्वारा पेश की गई नियमों की पाबंदी और सहनशीलता की एक बड़ी मिसाल है



